पालने वाले की मौत पर बंदर ने भी तोड़ा दम


मोहब्बत व स्वामिभक्ति सीखनी हो तो एक बेजुबान से सीखी जा सकती है। जिस पालक ने 15 दिन पहले उसे घर से भगा दिया था, उसी की मौत बर्दाश्त न कर पाने पर बेजुबान ने खुद भी अपने प्राण त्याग दिए। 



किशनपुर के मोहल्ला पाखरतर में रिटायर शिक्षक शिवराज सिंह अपनी पत्नी के साथ रहते थे। निसंतान होने के कारण उन्होंने एक बंदर को कई सालों से पाल रखा था। परिजनों ने बताया कि बंदर को वह सोनू के नाम से पुकारते थे और बच्चे की तरह उसका ख्याल भी रखते थे। कुछ महीनों से शिवराज सिंह अस्वथ्य चल रहे थे। चलने-फिरने में भी उन्हें काफी परेशानी हो रही थी। इस बीच सोनू (बंदर) की देखभाल भी ठीक ने नहीं हो पा रही थी। सोनू मोहल्ले के लोगों को काटने व छेड़ने भी लगा था। इससे परेशान होकर शिवराज बंदर को 15 दिन पूर्व खागा में छोड़ आए। लेकिन आठ फरवरी को बंदर फिर शिवराज के पास आ गया। परिजनों ने बताया कि मंगलवार शाम शिवराज ने बंदर को संतरा खाने के लिए दिया और खुद मीठी पूड़ी खा रहे थे, तभी शिवराज की हृदयगति रुकने मौत हो गई। घर के लोग रोने-बिलखने लगे। तभी बंदर शिवराज सिंह के शव के पास पहुंचा और अपना सिर रखकर लेट गया, कुछ देर बाद उसकी भी सांस थम गई।